🪔दीपावली
🪔८ नवम्बर २०२६ • रविवार

दीपावली महामहोत्सव 2026

श्री महालक्ष्मी, गणेश एवं कुबेर षोडशोपचार पावन पूजन

प्रदोष काल मुहूर्त समय गणना
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दीपावली दिनचर्या

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शास्त्रोक्त १८ चरण महालक्ष्मी विधि

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शुभ मुहूर्त एवं पंचांग

8 AUG 2026
प्रदोष काल (मुख्य पूजा)

06:45 PM – 09:05 PM

स्थिर वृषभ लग्न • स्थायी धन-समृद्धि
महानिशा काल (साधना)

11:42 PM – 12:28 AM

श्री सूक्त एवं कुबेर मंत्र सिद्धि

पावन दीपोत्सव कथाएं

3 अध्याय

समुद्र मंथन एवं माता लक्ष्मी का प्राकट्य

कार्तिक अमावस्या के पावन दिवस पर क्षीरसागर में समुद्र मंथन के दौरान भगवती महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ। देवी के दिव्य स्वरूप को देखकर समस्त देवता और मुनि नतमस्तक हो गए। माता ने प्रभु श्री नारायण को अपने जीवनसंगिनी रूप में वरण किया। इस दिन दीपमालाएं प्रज्वलित कर माता लक्ष्मी का सत्कार किया जाता है।

कथा ऑडियो सुनेंएआई पंडित स्वर (ऑडियो लिंक सक्रिय)
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दीपावली पावन ज्ञान प्रश्नोत्तरी

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पूजा सामग्री चेकलिस्ट

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मूर्तियां एवं वेदी वस्त्र
महालक्ष्मी एवं गणेश जी की मूर्ति
Divine symbols of wealth and wisdom
1 pair
कुबेर जी की प्रतिमा या चित्र
Guardian of cosmic treasures
1
लाल या पीला वेदी वस्त्र
Auspicious seat for deities
1 meter
लकड़ी की चौकी/बाजोट
Elevated sacred altar
1
पूजन द्रव्य एवं सामग्री
शुद्ध देशी गाय का घी
For main altar lamp
250g
सरसों या तिल का तेल
For outdoor earthen lamps
500ml
मिट्टी के दीये
Earthen body lit by inner divine flame
21 to 51
रुई की गोल व लंबी बत्ती
Channel of light
1 packet
रोली / कुमकुम
Auspicious tilak
1 packet
चन्दन पाउडर / लेप
Cooling fragrance
1 dibbi
अक्षत (बिना टूटे चावल)
Abundance and wholeness
1 bowl
मौली / कलावा धागा
Protection and sacred bond
1 roll
पवित्र गंगाजल
Sacred purification
1 bottle
चांदी के सिक्के
Token of wealth and prosperity
1-2
कमलगट्टे के बीज
Beloved to Goddess Lakshmi
5-11 seeds
पुष्प एवं मालाएं
कमल के पुष्प
Seat of Goddess Lakshmi
2
गेंदे के फूलों की माला
Joy and radiance
2-3
हरी दूर्वा घास
Beloved to Lord Ganesha
1 bundle
आम के 5 या 7 पत्ते
Adorning the Kalash
5-7
नैवेद्य एवं भोग
खील और बताशे
Traditional Diwali agricultural harvest offering
250g
केसरिया चावल की खीर
Supreme bhog for Lakshmi
1 bowl
बेसन या मोतीचूर के लड्डू
Lord Ganesha's favorite
500g
पंच फल (सेब, केला, अनार आदि)
Gratitude for nature's bounty
Assorted
मीठा पान (लौंग-इलायची युक्त)
Digestive and honoring tambula
2 pairs
संपूर्ण पूजा निर्देश एवं कथा

दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और मंत्र

दीपावली महालक्ष्मी-गणेश पूजा की प्रामाणिक षोडशोपचार विधि, प्रदोष काल व स्थिर लग्न मुहूर्त, महालक्ष्मी मंत्र, संपूर्ण कथा और बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न।

दीपावली महापर्व का परिचय

दीपावली (दीवाली) सनातन धर्म का सबसे पावन और प्रकाशमय महापर्व है, जो कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को पूरे उल्लास से मनाया जाता है। यह पावन पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास पश्चात अयोध्या आगमन तथा समुद्र मंथन से भगवती महालक्ष्मी के प्राकट्य का पावन उत्सव है। इस दिन घर-आंगन को स्वर्णमयी मिट्टी के दीपों, सुंदर रंगोली और सुगंधित पुष्पों से सजाकर अज्ञान, दरिद्रता व तिमिर को दूर कर सुख, शांति, सद्बुद्धि और अखण्ड समृद्धि का स्वागत किया जाता है।

धार्मिक महत्व व आत्मज्ञान

दीपावली का आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व अत्यंत गहरा है। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का संयुक्त पूजन यह संदेश देता है कि धन और समृद्धि (लक्ष्मी) तभी फलदायी और स्थायी होती है जब उसके साथ सद्बुद्धि और विवेक (गणेश) विद्यमान हो; बिना विवेक के धन विपत्ति ला सकता है, जबकि धर्मयुक्त लक्ष्मी यश और कल्याण प्रदान करती है। इस दिन धनाधिपति कुबेर तथा विद्यादायिनी मां सरस्वती का भी आह्वान किया जाता है। दीप प्रज्वलन हमारे अंतर्मन की आत्मज्योति को जाग्रत कर अज्ञान के अंधकार को मिटाने का पावन प्रतीक है।

"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ॥"
Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseeda Praseeda Shreem Hreem Shreem Om Mahalakshmyai Namah ||

हे कमल पुष्प पर विराजित भगवती महालक्ष्मी! मुझ पर प्रसन्न होइए, अपनी असीम कृपा बरसाइए। आपको कोटि-कोटि नमन। प्रदोष काल में इस महालक्ष्मी बीज मंत्र का भक्तिपूर्वक जप करने से दरिद्रता का नाश होकर अखंड सुख, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

प्रदोष काल व स्थिर लग्न मुहूर्त

दीपावली लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय प्रदोष काल में स्थिर लग्न (विशेषतः वृषभ लग्न) का माना जाता है, जो सूर्यास्त के उपरांत आता है। मान्यता है कि स्थिर लग्न में की गई पूजा से महालक्ष्मी घर में स्थिर वास करती हैं। इसके अतिरिक्त मध्यरात्रि का निशिता काल श्रीसूक्त पाठ और तंत्र-मंत्र साधना हेतु विशेष फलदायी होता है।

संपूर्ण पूजा सामग्री सूची

16 सामग्री
🪔
श्री गणेश एवं महालक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र
🪵
पूजा चौकी एवं लाल/पीला स्वच्छ रेशमी वस्त्र
🏺
तांबे/पीतल का कलश एवं गंगाजल मिश्रित जल
🥥
आम के पत्ते एवं मौली बंधा हुआ जटा वाला नारियल

विकल्प: अशोक के पत्ते व सुपारी

🪔
शुद्ध देसी घी एवं वेदी हेतु चौमुखी दीपक
✨
मिट्टी के दीपक (२१, ५१ या १०८) एवं सरसों या तिल का तेल
🔴
रोली, सिंदूर, कुमकुम, चंदन एवं अक्षत (साबुत चावल)
🥛
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, मिश्री)

विकल्प: शुद्ध दूध अथवा निर्मल गंगाजल

🌸
गुलाबी कमल का पुष्प / लाल गुलाब एवं गेंदे की माला

विकल्प: उपलब्ध ताजे सुगंधित पुष्प

🍬
मिठाई, खीर, बेसन के लड्डू, खील एवं बताशे
🕯️
कपूर, सुगंधित धूप, अगरबत्ती एवं आरती की थाली
🪙
चांदी/सोने का सिक्का अथवा नोट (कुबेर पूजन हेतु)वैकल्पिक

विकल्प: स्वच्छ सिक्का या पूजा की सुपारी

📿
माता लक्ष्मी हेतु सोलह श्रृंगार सामग्री (चूड़ी, बिंदी, मेंहदी)वैकल्पिक

विकल्प: लाल कलावा या चुनरी

🍃
तांबूल (पान के पत्ते), पूजा सुपारी, लौंग एवं इलायचीवैकल्पिक
🔔
पूजा घंटी एवं शंखवैकल्पिक

विकल्प: करतल ध्वनि एवं जयघोष

📖
बहीखाता एवं नई लेखनी/कलम (व्यापारियों हेतु)वैकल्पिक

दीपावली एवं श्रीराम आगमन संपूर्ण कथा

दीपावली की पावन कथा सनातन परंपरा के कई दिव्य प्रसंगों को अपने में समेटे हुए है। इसमें सर्वप्रमुख मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का लंकापति रावण का वध कर चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात अपनी पावन नगरी अयोध्या में पुनरागमन है। जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या पधारे, तो समस्त नगरवासी अपार हर्ष और भक्ति से झूम उठे। कार्तिक मास की घोर अंधियारी अमावस्या की रात्रि को अयोध्यावासियों ने करोड़ों घी के दीपक जलाकर पूरी नगरी को अलौकिक प्रकाश से जगमगा दिया। अयोध्या की वह दीपावली धर्म की विजय और 'राम राज्य' के शुभारंभ का अमर पर्व बन गई। इसके साथ ही पौराणिक मान्यता है कि जब देवताओं और दानवों ने अमृत प्राप्ति हेतु क्षीरसागर का मंथन (समुद्र मंथन) किया था, तब कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन ही भगवती महालक्ष्मी स्वर्णिम आभा के साथ कमल पुष्प पर प्रकट हुई थीं। माता लक्ष्मी ने भगवान श्री हरि विष्णु का वरण किया और संपूर्ण सृष्टि को सुख, ऐश्वर्य और शांति का वरदान दिया। अतः दीपावली प्रकाश की अंधकार पर विजय, धर्म की अधर्म पर विजय और मां महालक्ष्मी व श्री गणेश जी के दिव्य आशीर्वाद का महापर्व है।

दीपावली नियम व सावधानियां (क्या करें और क्या न करें)

क्या करें (Do's)

  • •Clean, declutter, and decorate your home and entrance altar prior to sunset
  • •Worship Lord Ganesha first before initiating Maha Lakshmi rituals
  • •Keep at least one four-wick pure cow ghee lamp burning continuously throughout the night
  • •Face towards the auspicious East or North direction during the puja
  • •Offer lotus flowers, kheer, batashas, and fresh fragrant seasonal sweets as bhog

क्या न करें (Don'ts)

  • •Avoid keeping broken glasses, damaged idols, or rusted iron items in the house
  • •Do not leave the main entrance in pitch darkness at any time during Diwali night
  • •Avoid using black or dark soiled clothes during Lakshmi-Ganesha pujan
  • •Do not consume non-satvik foods, alcohol, or engage in harsh arguments on this sacred day
  • •Do not blow out or sweep away the sacred lamps with feet or unwashed hands

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

माता लक्ष्मी धन-समृद्धि की देवी हैं और श्री गणेश बुद्धि व विवेक के दाता हैं। बिना सद्बुद्धि के धन विनाशकारी और अहंकार युक्त हो सकता है, इसलिए दोनों का संयुक्त पूजन स्थायी सुख और मंगल लाता है।

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