दिवस ७ (९ में से)
माँ कालरात्रि

माँ कालरात्रि पूजन

"एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥"

शुभ मुहूर्त11:43 AM – 12:26 PM
01घं
:
34मि
:
05से
१. शुभ रंग
Grey Ember
२. पावन भोग
गुड़ व नैवेद्यव तिल के लड्डू
३. प्रिय पुष्प
रात की रानीव गुड़हल के पुष्प

माँ कालरात्रि पूजा विधि

वैदिक मंत्रोच्चार व चरणबद्ध पूजन विधान

5 चरण
१

अंधकार नाशिनी माँ कालरात्रि ध्यान

माँ कालरात्रि के रौद्र किंतु भक्तों के लिए शुभंकरी स्वरूप का ध्यान करें।

२

गुड़ व तिल नैवेद्य अर्पण

संकटों से मुक्ति हेतु माँ को शुद्ध गुड़ व तिल की मिठाई का भोग लगाएं।

३

माँ कालरात्रि पावन व्रत कथा

रक्तबीज व शुंभ-निशुंभ के संहार हेतु प्रकट हुई अभयप्रदा माँ कालरात्रि की विजय कथा का श्रवण व पठन करें।

४

कालरात्रि स्तोत्र व मंत्र पाठ

समस्त कष्टों व ग्रह दोषों की शांति हेतु माँ कालरात्रि के मंत्र का १०८ बार जाप करें: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ कालरात्र्यै नमः

५

निशा महाआरती व शांति दीप

तिल के तेल व कर्पूर से माँ कालरात्रि की आरती करें एवं गुड़ का प्रसाद वितरित करें।

नवदुर्गा परिक्रमा • ९ पावन स्वरूप

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