दिवस ४ (९ में से)
माँ कूष्माण्डा

माँ कूष्माण्डा पूजन

"सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥"

शुभ मुहूर्त11:42 AM – 12:26 PM
01घं
:
34मि
:
05से
१. शुभ रंग
Royal Blue
२. पावन भोग
मालपुआव पेठे की मिठाई
३. प्रिय पुष्प
पीला कमलव चमेली पुष्प

माँ कूष्माण्डा पूजा विधि

वैदिक मंत्रोच्चार व चरणबद्ध पूजन विधान

5 चरण
१

कलश व कूष्माण्डा देवी पूजन

स्थापित कलश की पूजा के बाद माँ कूष्माण्डा का ध्यान करें, जिन्होंने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।

२

मालपुए का विशेष नैवेद्य

देवी को मालपुए व कुम्हड़ा (पेठा) अर्पित करने से आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

३

माँ कूष्माण्डा पावन व्रत कथा

अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली आदिशक्ति कूष्माण्डा देवी की पावन सृष्टि कथा का श्रवण व पठन करें।

४

अष्टभुजा ध्यान व स्तोत्र पाठ

माँ कूष्माण्डा के अष्टभुजा स्वरूप का ध्यान करते हुए उनके बीज मंत्र व स्तोत्र का पाठ करें: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ कूष्माण्डायै नमः

५

दिव्य महाआरती व प्रसाद

कर्पूर प्रज्वलित कर परिवार सहित माँ कूष्माण्डा की आरती करें और मालपुए का पावन प्रसाद ग्रहण करें।

नवदुर्गा परिक्रमा • ९ पावन स्वरूप

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